ठीक है…………. एकदम ना सही लेकिन अभी भी मोटा मोटा तो याद है मुझे, तब शायद तीसरी या चौथी कक्षा में रहा होऊंगा मैं, पिताजी सुबह-सुबह हमारे स्कूल जाने से बहुत पहले नि
भजन 9 शल्य कहने लगा की मेरा यह वचन है की जीत आपकी ही होगी। धर्म युधिष्ठिर वचन भरु सु ,नहीं करु कति टाल यो वचन मेरा सै , थारी जीत हुवै हर हाल ------
*** भजन - 08*** शल्य का पाडवों से मिलने के लिये जाना दुर्योधन को खुशी हुई ,जैसे कंगले को धन पाग्या युधिष्ठिर से मिलने खातिर, शल्य वहां जाने लाग्या
***भजन - 7*** शल्य का सत्कार तथा दुर्योधन और युधिष्ठिर को वचन देना बात दूत की सुनकै शल्य को पांडवों का ख्याल पड़ा एक अक्षौ
*** भजन 06 *** श्री कृष्ण जी कहने लागे, सुन दुर्योधन मेरी बात मुझको तो है दिया दिखाई ,पहले यहांं अर्जुन का गात --------टेक निःसंदेह कहा ठीक आपने
पुरोहित का हस्तिनापुर जाना और अर्जुन का श्रीकृष्ण के पास जाने के लिये चल पडना। भजन 05 हस्तिनापुर जब चला पुरोहित घड़ी महुर्त लग्न विचार अर्जुन भी कृष्ण
राजा द्रुपद का पुरोहित को भेजना
भजन - 4
द्रुपत बोले सुनो पुरोहित,संदेश आप ये ले
जाना
जैसा वहां आदेश मिलै वो यहां आकर के
बतलाना-श्री कृष्ण जी का विचार प्रकट व विराट द्वारा सब राजाओं को विद्वाई
भजन 3
जो द्रुपद जी नै बात बताई हम सब को भी है मन्जुर
युधिष्ठिर का कार्ज सिद्व हवहां राजा द्रुपद कहने लगे भजन 02 राजा द्रुपद बोला दुर्योधन देवै सहज में राज नहीं फंसा पुत्र मोह में धृतराष्ट्र,उसका कोई ईलाज नहीं --------टेक धृतर
विराट नगर में पांडव पक्ष का परमार्श सैन्य संग्रह और दूत भेजना
भजन 1*
युद्व मे जीत गऊ छुटवाकै कौरव मार
भगाये
दरबार लगा सत्कारउद्योग पर्व भाग 1
(उद्योग पर्व भाग 1)
ऊं नमो नारायण
गुरु महाराज जी
ऊण
ऊं श्री गणेशाय नमः
संक्षिप्त महाभारत
उद्योग पर्व
वैसे तो तीर्थ यात्रा दो तरह का होता है, एक जिसमें तीर्थ यात्री भगवान के प्रति समर्पित होते हैं, उन्हें किसी भी तरह के वातावरण या रहन-सहन का कोई प्रभाव नहीं